भाषा / Language
सुनो
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सुनो ....
आज इस दिल को लपेट कर रख दो
बस इक हंसी रहने दो ......दरमियां
थोड़े लफ्ज़ .....खट्टे मीठे
इक टुकड़ा ....इश्क़
और वो .....वो इक हिस्सा सुकून भी
इक साज़ ....
इक.... सरकती रात
कुछ मोगरे ....ये रंग पिघलते
इक.... जलता अलाव
और रत्ती भर ......तुम
और मैं ?
मैं ...इन सब में ज़रा ज़रा
अर्ज़ है ....
ख्वाइशों की
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें