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रचना 1733

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समर्पण से आखिरकार थक कर हम आत्मसमर्पण कर देते हैं

समर्पण से आखिरकार थक कर हम आत्मसमर्पण कर देते हैं .... फिर चाहे वो प्रेम हो या उससे मिली ढ़ेर सारी उदासियाँ कल्पना💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें