कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1705

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इतना तो तुम्हारे साथ हैं

इतना तो तुम्हारे साथ हैं... पाँच के अलावा सारे अंक खारिज़ कर दिए ... Gdp 5 पर ला दी चालान 5 गुना कर दिया। पाँच समझते हो? चलो उंगलियाँ खोलो.. एक दो तीन चार पाँच देखो कमल बना क्या ? Oh no......ये तो पंजा बन गया 😊😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें