भाषा / Language
तस्वीर वाली आँखों के लिए
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तस्वीर वाली आँखों के लिए...
क्या कह कर पुकारूं इन आंखों को ?
इस सोच को सैंकड़ों बार message box में लिख कर delete कर चुकी हूँ।हर बार "सुनो" पर zero down करती हूँ।जब बहुत प्यार आता है तो नाम लिख देती हूँ और जब miss करती हूँ तो अजनबी आँखें कह कर पुकारना पसंद है मुझे। तुमसे शायद कभी नहीं कह पाऊँ पर तुम्हारी आँखों को चूम कर love u कह कर देखना है ....एक पल के लिए उनमें रह कर देखना है। उस पल की चुप्पी को साथ ले जाने का मन है।
सुनो...
......
अजनबी....
दोगे न एक पल की चुप्पी ?
नाम की जगह छोड़ दी है....
इन आँखों को सिर्फ़ मेरी दुआ लगे। सब बस इन्हें मेरी आँखों से देखें ।
देखें कि एक नदी दो समन्दर में एक साथ कैसे समाती है?
प्रेम जब भी पास दिखाई न दे तो दूर से दूर तक सुनाई देता है... हूबहू तुम सा
सुनो...
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें