कल्पनाशब्दों के बीच
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शहर प्रेमियों से बनता है

शहर प्रेमियों से बनता है... वादे शब्दों से बनते हैं। मलबॉर्न की फिज़ा में दो मिली हथेलियां और दो मिलते मन को क़ैद किया। इनके बीच इश्क़ शहर बचा रहे....उस नीले रंग की तरह ☺☺
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें