कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 1700

भाषा / Language

कुछ शिकायतें लेकर

कुछ शिकायतें लेकर ....... जिया नहीं जाता मैंने ज़िन्दगी का पल्लू पकड़ कर कहा ....... "ज़िन्दगी" मुड़ी ..... मुस्कुराई और बोली ...... "मैं" खुद इक चलती-फिरती जद्दोजहद हूँ ..... ये अलग बात है ....... तुझे नज़र नहीं आता कल्पना💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें