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रचना 1693

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पाजी नज़्में

पाजी नज़्में ... शहद में लिपटा हुआ तीता सच । जिस सादगी से आपने ज़िन्दगी रखी है कागज़ पर फ़िदा हुआ जाता है मन 😊😊 गुलज़ार जी के साथ पाजी गुज़रे दो दिन। कुछ अपनी पसंदीदा नज़्में साँझा कर रहीं हूँ 😊😊😊 #किताब 2
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें