कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1694

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खिताब नहीं ... बेटी होने का हिसाब दिया है ।

खिताब नहीं ... बेटी होने का हिसाब दिया है । कुछ निगाहें बस आसमान छूने के लिए ही बनी होती हैं। तुम्हारी जैसी उन असंख्य आंखों को दुआ पहुँचे जो खेल जगत के आसमान को तकने की जुर्रत कर रहीं।प्रेरणा इसी लिए शायद स्त्रीलिंग वाला शब्द है।😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें