कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1510

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सिर्फ और सिर्फ खुद को बाँध कर रख सकूं इस लिए कागज़ पर शब्दों…

सिर्फ और सिर्फ खुद को बाँध कर रख सकूं इस लिए कागज़ पर शब्दों के अनगिनत सिरे खुले छोड़ देती हूँ । बहुत देर तक सांस आती रहती है..... जाती रहती है । तुम कविता समझ कर टाल देते हो। चाँद ......तुम कब सराहना सीखोगे?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें