ककल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 1509

भाषा / Language

इन आँखों में तुम्हारे लिए अब कुछ नहीं बचा

✦
इन आँखों में तुम्हारे लिए अब कुछ नहीं बचा..... जाओ... सूख जाओ सफेद पलाश इस कागज़ पर
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें