भाषा / Language
सौगात...... लप्रेक
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सौगात...... लप्रेक
"जब तुम मेरी छाया से हटोगे तो तुम जड़ बनोगे"
"और जब तुम मेरी छाया से हटोगी तो पंख "
दोनों एक दूसरे को बिना कोई सौगात दिए विपरीत दिशा में बढ़ गए।
उसी जगह पर आज एक बड़ा सा दरख़्त अनगिनत अनजाने परों को सौगात है ।
जाने किस की?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें