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रचना 1474

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जब किसी रोज़ तुम्हारी याद रखेंगे

जब किसी रोज़ तुम्हारी याद रखेंगे नीली नीली सफ़ेद पर बात रखेंगे बेशक ज़मीं में दफन है वजूद मेरा एक दिन तो असमानी औकात रखेंगे धोरे रेत के और इत्तु सी एक ओस दिलकश ऐसी कोई मुलाकात रखेंगे एक चाँद और पूरे ढाई आखर कम - कम में पूरी बारात रखेंगे
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें