कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 1476

भाषा / Language

एक धुंधली श्वेत श्याम तस्वीर से मेरी गुफ्तगू

एक धुंधली श्वेत श्याम तस्वीर से मेरी गुफ्तगू... वो दिखने में बेहद आम एक रोज़ाना सी शक्ल वाला ही वजूद था मेरे लिए पर जाने क्यों एक चुम्बक छिपाए फिरता था ...या फिर शायद बंदे की तस्वीर अच्छी आती होगी। तस्वीर का पीछा करते करते जब मैं उससे रूबरू हुई तो जाना कि वो एक बहुत बड़ा कैनवास है । उसके पास अनगिनत रंग हैं। उसकी उंगलियां रंगों से सनी रहती है। उसके चेहरे पर भी अक्सर इक्का दुक्का रंग यहां वहां ठहरे हुए नज़र आते हैं ।रंगों से ज्यादा उसके पास प्रेमिकाओं का कलेक्शन है। उन प्रेमिकाओं की अनगिनत कहानियों को वो हर पल अपने रंगों में घोलता रहता है।शायद इसी वजह से उसकी उकेरी हर प्रेमिका मुस्कुराती है। सब नीली चूड़ियां पहनने को बेक़रार रहती हैं ... पाश वाली । नीली चूड़ियाँ?.... हाँ वहीं नीली चूड़ियाँ जो उसकी उदासी से दिन भर भीगी रहती हैं और उसके पूरे कलेक्शन में सिर्फ़ एक पतली सी कलाई पर मुस्कुराती रहती हैं। बाक़ी सारी कलाइयाँ तो बाँवरी हैं उसके मोह से। सब पर सब्र बरसता रहे .. आमीन
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें