मेरे शब्दों में .... लेखिका बनने का आसमान हो न हो तुम्हारी प्रेमिका बने रहने की ज़मीं पूरी है ये अमृता जी ने कहीं लिखा नहीं पर दिखता सबको हर पंक्ति में है।