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रोज़मर्रा नहीं ........रोज़ाना कहा करो

रोज़मर्रा नहीं ........रोज़ाना कहा करो ..... मैं कॉफी में दो चम्मच इश्क़ ज्यादा लेती हूँ ....मीठा ही सही फ़ोन में पीली नारंगी खूबसूरती क़ैद है .... फिर वो पहाड़ की हो या बाँवरी पहाड़न की😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें