कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1403

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हम क्या मांगते हैं प्रेम में

हम क्या मांगते हैं प्रेम में ? स्थिरता .... वो भी प्रवाहमयी एक नाव में दो पैर एक पैर में दो नाव उफ्फ्फ्फ्फ....
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें