भाषा / Language
में आज ही के दिन लिखी ...😊😊
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2013 में आज ही के दिन लिखी ...😊😊
ये मेरी आँखें____
देखती हैं तो नजारा करती हैं तो इशारा
डोलती हैं तो आवारा बुझ गयी हैं तो बेचारा
बिछती हैं तो इंतज़ार उदासीन हैं तो हार
टोकती हैं तो इनकार सूखी हैं तो लाचार
समझती हैं तो विचार , मानती हैं तो इकरार
रूकती हैं तो चाहत , मांगती हैं तो इजाजत
नाचती हैं तो शरारत , चार हैं तो मुहब्बत
चमकती हैं तो सफलता , चूमती हैं तो ममता
बंधती हैं तो रिश्ता , ओजहीन हैं तो समझोता
सोचती हैं तो चिंता , लूटती हैं तो सुन्दरता
ठगती हैं तो धोखा ,सोती हैं तो निद्रा
उठती हैं तो चुनौती, चुप हैं तो संकोची
गढ़ती हैं तो जिद्दी , स्थिर हैं तो सच्ची
जलती हैं तो रोगी , बंद हैं तो जोगी
शांत हैं तो संतुष्टि , भूखी हैं तो लालची
बूढी हैं तो अनुभवी , रोती हैं तो दुखी
पूजती हैं तो वन्दनीय ,बोलती हैं तो अद्वितीय
लेती हैं तो मान ,देती हैं तो सम्मान
बढती हैं तो विकल्प, इकटक हैं तो संकल्प
लाल हैं तो क्रोधित, आंसू भरी हैं तो पीड़ित
टिकती है तो पसंद, नकारती हैं तो नापसंद
झपकती हैं तो तुरंत, पथराती हैं तो अंत
दो नैना और.. एक कहानी
नजरों की भाषा ,मेरी नजर से
अनकही , बे जुबानी_____कल्पना पाण्डेय
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें