कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1373

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जब भी कुछ लिखती हूँ

जब भी कुछ लिखती हूँ ..... तो तुम बला के खूबसूरत नज़र आते हो और .... वही अपना लिखा हुआ जब तुमसे सुनती हूँ .... गज़ब खूबसूरत हो जाती हूँ मैं वादा लिखे जाने का या .....सुनाये जाने का नहीं है वादा खूबसूरती का है ....मेरे शब्दों से मुझसे तुमसे बस रह जाने का है.... खूबसूरत हर बार .......बार बार मुझमें तुम में हम में
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें