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तुम्हारे शहर में इतनी तो जगह होगी ना कि मैं

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तुम्हारे शहर में इतनी तो जगह होगी ना कि मैं .. अपने जंगल अपना समुन्द्र अपने प्रश्न अपनी चुप और अपनी ये कलम रख सकूँ?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें