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कई दिनों से फिश टैंक सूना पड़ा था।एक एक कर सारी मछलियां रूठ…

कई दिनों से फिश टैंक सूना पड़ा था।एक एक कर सारी मछलियां रूठ गयी। दोपहर को कुछ नया करने की सोची। पहले अपने पौंधों को दुलारा संवारा फिर इस फिश टैंक को। देखिए चमक रहा अब। कितना सुकून है ना ... पुराने को फिर नया कर देने में 😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें