कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1356

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कारीगरी तो फासलों की थी

कारीगरी तो फासलों की थी ..... मैंने कागज़ पर तो दो ही शब्द लिखे थे... मैं .... तुम..... कहानियाँ बनती गयीं।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें