कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 1355

भाषा / Language

ख़ुद से बातें करने का एक ही शौक उसे सबसे अलग करता था। उसे पल…

ख़ुद से बातें करने का एक ही शौक उसे सबसे अलग करता था। उसे पल लिखने की आदत थी।वह अक्सर अपने लिए ही ख़त लिखा करता था पर उदासी उसके चाहने वालों तक पहुंच जाती थी। पते वाली जगह पर उसके तीन अक्षर वाले नाम भर ही जगह बची रहती थी पर न जाने कैसे जो कोई उसे पढ़ता वह ये सोच कर जी जाता कि उदासी उसके नाम आयी है।सब उसका नाम खुरच कर अपना नाम लिख देते थे। उदासी के आदी लोगों को उससे अपार प्रेम था और उसको सिर्फ़ खुद से और खुद से। दो बार खुद से ...खुद से इसलिए लिखा कि स्वार्थी न लगे प्रेम ।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें