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हथेली में कल वाली मुलाक़ात रख कर तुम मुझे और भी चटक कर गए...…

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हथेली में कल वाली मुलाक़ात रख कर तुम मुझे और भी चटक कर गए...रंगरेज़ मेरी मुस्कान में एक तुम ही हो जो अनगिनत इंद्रधनुष बाँध सकता है...बिना छुए शुक्रिया तुम्हारा 😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें