भाषा / Language
जाने दीजिए ....मैं धुआँ ही क़ैद करना चाहूंगी ।राख कुछ दिनों…
✦
जाने दीजिए ....मैं धुआँ ही क़ैद करना चाहूंगी ।राख कुछ दिनों बाद चुभने लगेगी।
अरे ! आप याद समझ रहे ...
मैं तो उस अजनबी की सिगरेट से कह रही थी जो उसकी उंगलियों से जाने कितने बरस के प्रेम में है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें