कल्पनाशब्दों के बीच
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लड़की ने स्कार्फ बाँधा, स्कूटर स्टार्ट किया और चली गयी. अचान…

लड़की ने स्कार्फ बाँधा, स्कूटर स्टार्ट किया और चली गयी. अचानक मदभरी छाया की जगह धूप खिल आई. एक सन्नाटा पसर गया. स्वप्न में हवाई जहाज क्रेश होते बचा और आँख खुल गयी. .... Kc Sir की इस कहानी को यहां से अपनी तरह से आगे बढ़ाया । पहली कोशिश.... ऐसा कभी लिखा नहीं पर मन है कि मैं भी किसी रोज़ कहानियां बुन सकूँ । पढ़ के देखिए तो... अक्सर आँख खुल जाने पर टूट जाने वाले सपने वहीं से शुरू होते हैं जहां छूटे हों। पर जाने क्यों ये वाला पलट कर फ़िर उसी पंक्ति पर जाकर बैठ गया जहां पर लड़की ने स्कार्फ़ बांधा था। स्कूटर फ्लैशबैक में गया तो पर इस बार स्टार्ट होने से मुकर गया।अपनी ही आवाज़ को पहचानने से इनकार कर दिया हो जैसे। गर्रर गर्र की आवाज़ के बीच अभिमन्यु अब भी सुनो, excuse me ,hello जैसे शब्दों को सुनने की कोशिश कर रहा था।वो चाह रहा था कि शोर रुके और कोई आवाज़ आये ।जान बुझ कर वो पीठफेर कर दूसरी तरफ़ देख कर सिगरेट सुलगाने लगा ।उसने शायद कहीं पढ़ा था पीठ फेर लो तो लोग छू कर बुलाते हैं ।इशारे से नहीं। आवाज़ क्या है ? शायद कुछ ज्यादा शोर या कुछ कम शब्द । लड़की ने कम शब्दों को चुना... आप अभिमन्यु हो ना ? अभिमन्यु अब भी गर्र गर्र में खोया हुआ था और मीठे धुएं से एक आवाज़ बनाने की कोशिश में लगा था। हल्का स्पर्श जब मीठी सी आवाज़ से मिल जाए तो स्पंदन ही कहलाता होगा या फिर ... सुनिए जरा।आप अभिमन्यु ही हो ना ।बुरा न माने तो एक सिगरेट मिलेगी ।ये स्कूटर भी ना .....धोखा दे गया। धोखा और सिगरेट पर्यायवाची भी थे ये पता तो था पर सिद्ध उसी दिन हुआ। Sure ... जी मैं "अभी "... I mean Abhimanyu. बची हुई दो सिगरेट केस खोल कर आगे बढ़ा कर अभिमन्यु मन ही मन खुद पर हंसने लगा .... यारा नाम छोटा कर देने से दूरी कम नहीं होती। मौसम तो चक्कर लगाने से ही बदलते हैं । "अभी " अभी तो दिन का "द" भी नहीं निकला। सिगरेट होठों से दबाए हुए दोनों हाथों से स्कार्फ़ खोलते हुए लड़की बेहद casual अंदाज़ में बोली I am Naina ....Second year same college. Science लेनी पड़ी क्योंकि घरवाले humanities को पढ़ाई नहीं समझते I am into dance and drama. अभिमन्यु तो नैना सुनकर ही फ्रीज हो गया। बाकी की सारी बातें वहीं चहक कर सामने की चाय की टपरी पर जम गयी। नीले रंग का टॉप और सफेद long स्कर्ट ... white शर्ट और ब्लू जीन्स । कॉम्बिनेशन्स सामने से देखने में दो ही रंग थे पर इनके बीच कई रंगों की कहानियाँ तैरने लगी थी । Poles apart ...पहली कहानी शायद इस लिए भी ...दूसरी कहानी कभी यूँ भी तो हो...तीसरी और भी न जाने कितनी। लिखने के अलावा आप और क्या करते हो अभी ? अभी ? तो मैं सिर्फ़ आपको देख रहा हूँ ... ये कह ही देता अभिमन्यु कि अचानक उसको लगा दिन का "द" शायद हिलने तो लगा ... "अभी" ? उसका निकनेम लेकर पूछ रही थी नैना। जी फिलहाल तो अपनी किताब पर प्ले की तैयारी है। कुछ किरदार उलझे हुए हैं कुछ खोए हुए ।उन्हीं को खोज रहा हूँ। चाय के कप कब भरे कब खाली हुए ये कोई नहीं जानता । हाँ कितने बार खाली हुए कितनी बार भरे ये टपरी वाले को जरूर हिसाब था जब उसने कहा होते तो 40 है पर आप 50 दे दो।पिछले बार के 10 बचे हैं। नैना ज़ोर ज़ोर से हँसने लगी ... 10 बच्चे हैं ? किसके भाई? शायद तुमसे कह रहा अभी। कल मिलती हूँ । तुम्हारे प्ले की कहानी सुनूँगी। अभिमन्यु अभी सिगरेट के छल्ले और चाय की प्याली से उभरा ही था कि नैना फ़िज़ा में ढ़ेर सारी हँसी बिखेर कर उड़ गयी । इस बार स्कूटर भी मुआ चुपचाप बिनाआवाज़ चल पड़ा।जैसे नैना की बातों पर मुंह दबा कर हँस रहा हो। शाम के बाद ही रोज़ाना रात आती थी .. उस दिन शाम को टाप कर सीधे रात ही हो गयी हो जैसे। अभिमन्यु कत्तई आँखें मत खोलना ... नैना आ जाएगी।कल उसी हँसी के आगे से शुरुवात करेंगे। मुस्कुराते हुए अभिमन्यु उठा और रेडियो को और पास सरका लिया । RJ गिन्नी भी ना ......उस तरफ से चहक कर बोली नैना के ऊपर जो 5 गाने गा देगा उसे गिफ्ट hamper फ्री... आप सब सोचिए और तब तक सुनिए ये गाना ...तेरे नैना बड़े कातिल मार ही डालेंगे। अभी ? सो गए क्या ? 😊😊😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें