शब्द कितने भी नश्तर हों.... कागज़ फूल ही रहेगा। बदलता नहीं ना! 😊😊😊😊
रचना 128610 अगस्त 2018भाषा / Languageहिन्दीEnglishशब्द कितने भी नश्तर हों.... कागज़ फूल ही रहेगा।✦शब्द कितने भी नश्तर हों.... कागज़ फूल ही रहेगा। बदलता नहीं ना! 😊😊😊😊कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें