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शब्द कितने भी नश्तर हों.... कागज़ फूल ही रहेगा।

शब्द कितने भी नश्तर हों.... कागज़ फूल ही रहेगा। बदलता नहीं ना! 😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें