कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 1285

भाषा / Language

कुछ तो आकार होता ही होगा इन शब्दों का

कुछ तो आकार होता ही होगा इन शब्दों का....... या तो..... नुकीले होते होंगे रूह से लहू रिसाने वाले अपना "मैं"..... चुभाने वाले या फिर.... गोल गोल घिसे हुए रूह से रूह सहलाने वाले मेरा "मैं"...... दिखाने वाले इनके आकार..... प्रकार से ही तो "मैं " जीवित है मेरा भी..... तुम्हारा भी .....
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें