कागज़ में उदासियों को भरकर धुंआ सा उड़ा देने से बेहतर है उन्हें गाज बनाकर कागज़ पर ही रख छोड़ ना कुछ देर बाद उदास नज़्म उभरेगी जरूर। वो उदासी कहेगी जरूर।