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रचना 1183

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कागज़ में

कागज़ में उदासियों को भरकर धुंआ सा उड़ा देने से बेहतर है उन्हें गाज बनाकर कागज़ पर ही रख छोड़ ना कुछ देर बाद उदास नज़्म उभरेगी जरूर। वो उदासी कहेगी जरूर।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें