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इतना इत्मिनान भी कम है कि आज भी डायरी के हर पन्ने पर तुम ज़…

इतना इत्मिनान भी कम है कि आज भी डायरी के हर पन्ने पर तुम ज़रा ज़रा रुके हुए हो। पन्ने कभी खाली नहीं हुए और डायरी कभी भरी नहीं। सफर और मंज़िल एक साथ तह लगाकर रखे हुए हैं ।कितने खूबसूरत लग रहे तुम। 😊😊😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें