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उस बाहरी शोर की तरंगें

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उस बाहरी शोर की तरंगें ...... मेरे आतंरिक उफान से मेल नहीं खाती इस लिए ... हम दोनों का खामोश हो जाना और चुपचाप अपने रस्ते चलते चले जाना ठीक रहेगा मिलेंगे इक बार फिर ..... शोर और उफान के साथ .... किसके हिस्से .....कितना क्या क्या होगा ? ये हम नहीं ...... हमारा सफ़र बताएगा
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें