कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 1145

भाषा / Language

उन्होंने कभी "हाँ"नहीं कहा.... बस जो मैंने कहा उसमें एक शब्…

उन्होंने कभी "हाँ"नहीं कहा.... बस जो मैंने कहा उसमें एक शब्द ऐसा जोड़ दिया कि वो हूबहू हाँ जैसा भरम पैदा कर दे। ये उनकी कारीगरी नहीं हो सकती । ये बेशक कुछ ऐसा है जो उनको मेरे लिए रुका हुआ ही खूबसूरत लगता है । बैराज के उस तरफ का रुका हुआ पानी हो जैसे। कभी सोचती हूँ शायद पा लेने से ज्यादा कठिन है "कहीं इसे भी खो ना दूँ" वाले डर को जीना। देखिए आपको भी "ना "नहीं ...अभी अभी "हाँ" ही सुनाई दिया होगा । बैराज खुला है पर बहेगा नहीं ..... ये वाला भरम बहुत तीखा है पर जिंदा तो है और मेरे जैसा जिद्दी भी।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें