भाषा / Language
तुम मेरे लिए क्या हो कल्पना
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तुम मेरे लिए क्या हो कल्पना ?
उस रोज़ मुड़े पन्ने ने मुझसे पूछा ....
टीस और खनक ....
बस दो ही शब्दों से बनी
आज कहानी ....
कल ग़ज़ल हूँ तुम्हारी
मैंने मुस्कुराते हुए कहा।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें