जिस भी रोज़ ..... मेरा सा कुछ ....कुछ तुम मुझमें धरते चले जाते हो ..... मैं ......मुकम्मल नज़र आती हूँ फिर..... मैं ही मैं होती चली जाती हूँ सुनो ! आवाज़ दो मुझको