कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 1105

भाषा / Language

दिन में से अगर दिन बच गया तो "रात

दिन में से अगर दिन बच गया तो "रात"..... रात में से गर रात बाकी रह गयी तो "दिन " हो जाऊंगी । औरत हूँ... जिस्म से जहान होने में वक़्त ही कहाँ लगता है मुझे?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें