रोज़ तुमसे दिल का रिश्ता बुनती हूँ... रोज़ ख़ामोश कर देती हूँ। बखिया उधेड़ना कब मुश्किल होता है।
रचना 11044 अप्रैल 2018भाषा / Languageहिन्दीEnglishरोज़ तुमसे दिल का रिश्ता बुनती हूँ✦रोज़ तुमसे दिल का रिश्ता बुनती हूँ... रोज़ ख़ामोश कर देती हूँ। बखिया उधेड़ना कब मुश्किल होता है।कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें