भाषा / Language
रोज़ वाले दिन को
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रोज़ वाले दिन को
घूम घूम कर
रात बना देनी वाली
ये औरतें
जाने अपने लिए ही क्यों "बस" कहना भूल गई हैं?
ये बिना धूरी का गोला भर
औरतें
ये लटटू लटटू फिरती औरतें।
लाओ आज तुम्हें बस दो अक्षर सीखा दूँ
"ना " कैसे कहें .....दिखा दूँ
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें