कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 1070

भाषा / Language

वो रोज़ कागज़ पर भरम रखता है

वो रोज़ कागज़ पर भरम रखता है... मैं उसे रोज़ एक कहानी कर देती हूँ। सिलसिला ये चाहत का न मैंने बुझने दिया...... भरम का बोझ नहीं होता । और ना ही पसंदीदा कहानियों का जी भर के रखते जाइए .... सुख़न हम भी जी भर के जी रहे।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें