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कुछ खिड़कियां ....समुन्दर को खुलती हैं

कुछ खिड़कियां ....समुन्दर को खुलती हैं और कुछ रेतीले टीलों पर बियाबान ... दोनों के हिस्से का है जो पानी से होकर गुजरता है। कलम की आंखें कितना दूर तक देखती हैं
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें