जब किसी रोज़ तुम्हारी रुबाइयाँ खत्म हो जाएं .... मेरी तनहाइयाँ ले जाना एक सी बहर होगी...... शायद
रचना 100618 जनवरी 2018भाषा / Languageहिन्दीEnglishजब किसी रोज़ तुम्हारी रुबाइयाँ खत्म हो जाएं✦जब किसी रोज़ तुम्हारी रुबाइयाँ खत्म हो जाएं .... मेरी तनहाइयाँ ले जाना एक सी बहर होगी...... शायदकल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें