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रचना 0998

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तुम बैर रख लो .... इश्क़ का

तुम बैर रख लो .... इश्क़ का प्रेम तो उड़ जाता है ..... ना जाने कितनों की तरफ मुड़ जाता है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें