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रचना 0999

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बड़ा मखमली होता है

बड़ा मखमली होता है ...... उन अनछुई "ख्वाइशों" को अचानक ऐसे ही ..... भूले से छू लेना कुछ पल निहारना , आंसूं से पोंछना , इक लम्बी सी आह भरना , उन्हें कुछ पल आज़ाद करना , संग उड़ ना........ बस .......खो जाना और चूम कर , इक बार ......फिर बंद पलकों में धर लेना , तुम्हारी हूँ .......दिल ही दिल में कहना तुम सिर्फ मेरी हो, मेरी ही रहना ...... ऐसा ,कुछ कानों में कहना उन अनछुई "ख्वाइशों" को मुस्कुराकर अलविदा कहना बड़ा मखमली होता है ...... कल्पना पाण्डेय
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें