भाषा / Language
माँ
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माँ........
अंश जब मेरा तुझमें आया ,मन तेरा भी हर्षाया था ना माँ
बेटी की आस में ,तूने कई बार हाथ फैलाया
था ना माँ
रुई से हाथों से ,तूने मुझे " यूँ "फक्र से उठाया था ना माँ
किलकारी भरे आँचल में हंसकर मुझे भी छिपाया था ना माँ
अपनी लोरी में हर रात इक नयी परी को बुलाया था ना माँ
पहली नज़र में तूने मुझे अपना सब कुछ बनाया था ना माँ
गोद में मुझे उठाकर तूने भी खुद को पूर्ण पाया था ना माँ
मुझे तू मिली ,तुझे भी तो ममता का तमगा भाया था ना माँ
बेटी सुनकर खुद को बहुत किस्मत वाली बुलाया था ना माँ
अपनी परछाई को थामे मन तेरा भी इतराया
था ना माँ
रुनझुन छुन छुन मैं चली ,तूने भी ठुमका लगाया था ना माँ
तुतलाती मेरी बातें सुन गला तेरा भी भर आया था ना माँ
अपनी हर कहानी में तूने मुझे राजकुमारी बनाया था न माँ
हर चोट को मेरी तूने आंसू से फूँक कर धुलाया था ना माँ
गिर गिर के उठना तूने ही तो हर रोज़ सिखाया था ना माँ
मेरी नादानियों में चुप्पी का चांटा जोर से लगाया था ना माँ
संस्कारों में लिपटे रहना ,सदा तूने ही रटाया
था न माँ
ख्वाइशों को मेरी, दुपट्टे से पोंछ कर रोज़ नया बनाया था न माँ
कोशिशों में दरारें गिना कर ,मुझे बेहतर बनाया था ना माँ
मेरे शौक को अपना बताकर ,आँखों में सजाया था ना माँ
मेरी नाकामी को ,सर से वार कर दूर फिकवाया था न माँ
मेरी ज़िन्दगी में ,दुआओं से लदा पौंधा लगाया
था ना माँ
मेरे हर रूप में तूने हर बार अपना प्रतिरूप पाया था ना माँ
कल्पना पाण्डेय
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें