कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0991

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ख़ाली हाथों में भरी लकीरों से हो तुम

ख़ाली हाथों में भरी लकीरों से हो तुम ... शब्दों से खुश कर देना ... बस यही दे जाना ....तोहफ़ा इस बार का
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें