कल्पनाशब्दों के बीच
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"कोसा" ....ये शब्द यकीनन तुमसे ही बनता होगा

"कोसा" ....ये शब्द यकीनन तुमसे ही बनता होगा सर्द मौसम में ये देखो कितने ही अक्षर औंधे पड़े हैं ..... धूप में सूख रहे हैं। भीनी भीनी गुलाबी पहाड़ी धूप .... अलविदा 💐💐💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें