भाषा / Language
कौन कहता है निर्वात से कुछ लिखा नहीं जा सकता
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कौन कहता है निर्वात से कुछ लिखा नहीं जा सकता?
देखो मैंने अभी अभी लिखा.............
"फ़ासले "
मेरी खिड़की पर बैरी चाँद आज बड़े दिनों बाद टिका है।
प्रेम झिड़की तो बनती है।
😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें