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रचना 0963

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हम क्या मांगते हैं प्रेम में

हम क्या मांगते हैं प्रेम में ? स्थिरता .... वो भी प्रवाहमयी एक नाव में दो पैर एक पैर में दो नाव उफ्फ्फ्फ्फ.... कितना मस्त confusion 😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें