भाषा / Language
चुपके से बीत जाने वाले पल काश मेरी उंगलियों में रच जाते
✦
चुपके से बीत जाने वाले पल काश मेरी उंगलियों में रच जाते .....
कविता आसान हो जाती ..... भूली जाने के लिए
तुम मुश्किल हो जाते .... ग़ुम होने के लिए
हथेलियां महकती रहती ...
लम्स के फूलों से कभी
कभी लफ़्ज़ के गुलों से भी
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें