भाषा / Language
कुछ सोखना चाहूँ तो तेरी उदासियों से ज़्यादा दिलकश कुछ भी नही…
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कुछ सोखना चाहूँ तो तेरी उदासियों से ज़्यादा दिलकश कुछ भी नहीं दिखता इस कागज़ पर।
लफ़्ज़ों वाला mirage... आज फिर देखा
शुक्रिया हमेशा वाला
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें