कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0959

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कुछ सोखना चाहूँ तो तेरी उदासियों से ज़्यादा दिलकश कुछ भी नही…

कुछ सोखना चाहूँ तो तेरी उदासियों से ज़्यादा दिलकश कुछ भी नहीं दिखता इस कागज़ पर। लफ़्ज़ों वाला mirage... आज फिर देखा शुक्रिया हमेशा वाला
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें