भाषा / Language
तुम्हारा भरम रखे रहना चाहती हूं
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तुम्हारा भरम रखे रहना चाहती हूं....
चाक ढूंढ रही जो तुम्हें हूबहू गढ़ सके मेरे लिए ।
खुशबू मैं खुद भर लूँगी ।
भरम मेरा तो खुशबू भी मेरी ही रहेगी ना।
तुम्हारा होना लाजमी नहीं.... तो ना सही।
खुशियां बहाने से नहीं..... लाने से आती हैं।
मैं भरम पालने में माहिर हूँ।
😊😊😊😊😊 याद
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें