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रचना 0692

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अगर अपने अस्तित्व की

अगर अपने अस्तित्व की तीन गांठें ...... प्रेम , अश्रु व क्रोध उचित समय पर "बांधे" और उचित समय पर "खोले" तो क्या कुछ जीत नहीं सकती .......नारी !
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें